सत्यधारा 24 | नई दिल्ली

देश की सियासत में इन दिनों राजनीतिक बयानों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर बनने वाले नए-नए ‘पार्टी ब्रांड’ भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बाद अब ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम से एक नया सोशल मीडिया अकाउंट सामने आया है, जिसने कम समय में ही बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

पीएम मोदी के बयान के बाद आया नया नाम

मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के लाल किले से दिए गए संबोधन के बाद चर्चा में आया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद के अलावा वैचारिक स्तर पर सक्रिय बताए जा रहे ‘दिमागी नक्सलियों’ का भी जिक्र किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसी शब्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

इसी माहौल के बीच Instagram पर ‘Dimagi Naxal Party’ नाम से अकाउंट सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक अकाउंट ने शुरुआती 24 घंटे में ही एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए और इसके बाद संख्या तेजी से बढ़ी।

कौन है इसका संस्थापक?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ किसने बनाई?

फिलहाल इसके पीछे किसी व्यक्ति या संगठन की आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई है। अकाउंट के बायो में संस्थापक के तौर पर ‘एक दिमागी भारतीय’ और सह-संस्थापक के तौर पर ‘56 इंच वाले’ जैसे नाम लिखे बताए जा रहे हैं। इसलिए इसके वास्तविक संचालक की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

‘सोचो, रिसर्च करो, विरोध करो’ बना नारा

सोशल मीडिया अकाउंट की प्रोफाइल में ‘सोचो। रिसर्च करो। विरोध करो।’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। कुछ पोस्ट में इसे भगत सिंह की विचारधारा का अनुयायी बताया गया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये दावे स्वयं सोशल मीडिया अकाउंट की ओर से किए गए हैं और इनके पीछे मौजूद वास्तविक लोगों की पहचान स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुई है।

क्या यह असली राजनीतिक पार्टी है?

नहीं। फिलहाल ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ को चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में नहीं देखा जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे सोशल मीडिया पर शुरू हुई डिजिटल पहल बताया गया है।

यानी फिलहाल यह चुनावी राजनीति की पार्टी से ज्यादा सोशल मीडिया की राजनीतिक प्रतिक्रिया नजर आ रही है।

CJP के बाद दूसरा डिजिटल प्रयोग

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ के नाम से अकाउंट का सामने आना यह भी दिखाता है कि राजनीतिक बयानों और सोशल मीडिया ट्रेंड के बीच दूरी लगातार कम हो रही है।

एक बयान, एक नया राजनीतिक शब्द और उसके बाद उसी नाम से सोशल मीडिया अकाउंट—अब यह सिलसिला भारतीय इंटरनेट राजनीति का नया ट्रेंड बनता दिखाई दे रहा है।

सत्यधारा 24 की नजर:
यह पूरा मामला फिलहाल सोशल मीडिया और राजनीतिक व्यंग्य के दायरे में है। इसके पीछे कौन लोग हैं, इसका स्पष्ट खुलासा होने तक इसे किसी वास्तविक राजनीतिक संगठन के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

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