13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद नया अध्याय; किसी दल का दामन थामने के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने का ऐलान
लखनऊ | सत्यधारा 24
उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने अगले कदम को लेकर चल रहे सस्पेंस को खत्म कर दिया है। मंगलवार, 29 सितंबर को जारी वीडियो संदेश में उन्होंने राजनीति में उतरने का ऐलान किया। दिव्या मित्तल ने साफ कहा कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी और जनता के साथ मिलकर स्वतंत्र राजनीतिक मंच खड़ा करेंगी।
अपने संदेश में उन्होंने कहा—“यूपी में ही रहूंगी, डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बाहुबल की राजनीति नहीं चाहिए और वह जनता के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहती हैं।
मंजूरी और बजट के बाद भी काम क्यों रुक जाता है?
दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि कई बार किसी समस्या के समाधान के लिए नियम, मंजूरी और बजट मौजूद होते हैं, लेकिन इसके बावजूद काम आगे नहीं बढ़ता।
उनके मुताबिक कई मामलों में समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि इरादे की कमी से जुड़ी होती है।
उन्होंने दूरदराज के एक गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि कक्षा पांच के बाद बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल की जरूरत थी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बावजूद वर्षों तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियम और संसाधन मौजूद हैं तो फिर काम क्यों नहीं हो रहा?
इसी तरह उन्होंने एक भूमिहीन लाभार्थी का उदाहरण भी दिया, जिसके पास जमीन आवंटन से जुड़े सरकारी दस्तावेज होने के बावजूद वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया। उनके अनुसार जांच में रिपोर्टों से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं और सुधारात्मक कार्रवाई भी हुई, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने ऐसे मामलों में कथित “ऊपरी स्तर के हस्तक्षेप” पर भी सवाल उठाया।
सड़क, रोजगार और पेपर लीक होंगे बड़े मुद्दे
पूर्व IAS अधिकारी ने अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं में ग्रामीण इलाकों की कमजोर बुनियादी सुविधाओं, असुरक्षित सड़कों, परीक्षा पेपर लीक और AI के दौर में रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखा।
उनका कहना है कि इन विषयों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि व्यापक सार्वजनिक चर्चा और नीति स्तर पर गंभीर काम की जरूरत है।
दिव्या मित्तल ने कहा कि वह ऐसी राजनीति चाहती हैं, जिसमें इरादा, न्याय, चिंता और दूरदर्शी सोच केंद्र में हो।
किसी पार्टी का टिकट नहीं, स्वतंत्र मंच से राजनीति
दिव्या मित्तल ने फिलहाल किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक मंच के जरिए जनता के बीच जाने की बात कही है।
उन्होंने शिक्षकों, किसानों, छात्रों, डॉक्टरों, मजदूरों और वकीलों समेत अलग-अलग वर्गों के लोगों से इस प्रयास से जुड़ने की अपील की।
उनके मुताबिक मकसद सिर्फ राजनीतिक चेहरों को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव लाना है।
13 साल की IAS सेवा के बाद राजनीति की राह
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद 30 अगस्त 2026 को इस्तीफे की घोषणा की थी। उनका इस्तीफा सितंबर में स्वीकार हुआ और 15 सितंबर 2026 से वह प्रशासनिक सेवा से औपचारिक रूप से बाहर हो गईं।
अपने प्रशासनिक करियर के दौरान वह मिर्जापुर और देवरिया समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर रहीं। मिर्जापुर में एक दूरदराज पहाड़ी गांव तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने के काम से भी उन्हें पहचान मिली थी।
अब प्रशासनिक सेवा से बाहर आने के करीब दो सप्ताह बाद उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का ऐलान कर दिया है।
अब असली सवाल—स्वतंत्र मंच कितना असर पैदा करेगा?
दिव्या मित्तल का राजनीतिक प्रवेश इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने किसी स्थापित राजनीतिक दल का रास्ता चुनने के बजाय स्वतंत्र मंच और सीधे जनता के बीच जाने का विकल्प रखा है।
अब देखने वाली बात होगी कि उनका यह नया राजनीतिक प्रयोग किस तरह आकार लेता है, संगठन का स्वरूप क्या रहता है और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच उन्हें कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।
सत्यधारा 24 | विशेष रिपोर्ट
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