सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी; चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को बताया “भ्रामक”
नई दिल्ली। मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद फिर तेज हो गया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर Form 6 में कथित तौर पर “अवैध और एकतरफा” बदलाव करने का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने 5 अक्टूबर को कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह बात स्पष्ट हो गई है कि Form 6 में बदलाव किया गया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में Form 6 में किए गए कथित बदलाव को लेकर हुई सुनवाई के बाद सामने आया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि Form 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद वह देखना चाहेगी कि Form 6 में किसने और क्या बदलाव किया।
अदालत में यह मामला मुख्य रूप से उस अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा है, जिसे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान Form 6 के साथ जोड़ा गया है।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को बताया “भ्रामक”
राहुल गांधी के बयान के बाद चुनाव आयोग ने उनके दावे को “misleading” यानी भ्रामक बताया।
आयोग का कहना है कि Form 6 में मूल वैधानिक बदलाव नहीं किया गया है। उसके अनुसार, बिहार में SIR के लिए जारी आदेश के तहत Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि बिहार में SIR शुरू करने का 24 जून 2025 का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था।
26 सितंबर के प्रेस नोट से शुरू हुआ विवाद
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर 2026 के अपने प्रेस नोट में कहा था कि SIR के लिए Form 6 के साथ लगाया गया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है।
इसी दावे को राहुल गांधी ने अपनी 5 अक्टूबर की पोस्ट में उठाया और सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के संदर्भ में सवाल खड़े किए।
Form 6 में आखिर क्या है?
Form 6 का इस्तेमाल पात्र नागरिक द्वारा मतदाता सूची में पहली बार अपना नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी Form 6 को नए मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित आवेदन के रूप में उपलब्ध कराया गया है।
SIR के दौरान इसी Form 6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर अब राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हुआ है।
अभी क्या स्थिति है?
मौजूदा स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने Form 6 में अवैध बदलाव किया है। अदालत ने केवल यह स्पष्ट किया है कि संशोधित Form 6 को उसकी मंजूरी प्राप्त नहीं थी और रिकॉर्ड सामने आने पर बदलाव से जुड़े तथ्य देखे जाएंगे।
वहीं, राहुल गांधी इस टिप्पणी को अपने आरोप के समर्थन के रूप में देख रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग उनके दावे को भ्रामक बता रहा है। इसलिए मामले में आगे की तस्वीर अदालत के सामने रिकॉर्ड आने के बाद और स्पष्ट होगी।
