वन मंत्री बोले—‘हरित छत्तीसगढ़–समृद्ध छत्तीसगढ़’ की दिशा में बढ़ रही साय सरकार, वन संरक्षण के साथ वनवासियों की आय और रोजगार पर जोर

रायपुर | सत्यधारा 24

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण को वनवासियों की आर्थिक समृद्धि, किसानों की आय, रोजगार, जनजातीय संस्कृति और वन्यजीव संरक्षण से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। सरकार का लक्ष्य ‘हरित छत्तीसगढ़–समृद्ध छत्तीसगढ़’ के संकल्प को धरातल पर मजबूत करना है।

नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित पत्रकार वार्ता में केदार कश्यप ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों और आने वाली योजनाओं की जानकारी साझा की।

62 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर 3.67 करोड़ पौधे

केदार कश्यप ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के जरिए वृक्षारोपण को किसानों की अतिरिक्त आय से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के तहत 5 एकड़ तक की भूमि पर 100 प्रतिशत और 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जाता है।

पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि पर 3.675 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलने के साथ प्रदेश की हरियाली भी बढ़ेगी।

तेंदूपत्ता संग्राहकों को 757 करोड़ रुपये का भुगतान

वन मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जंगलों के संरक्षण के साथ उन परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी है, जिनकी आजीविका वनों से जुड़ी है।

वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया। इसके एवज में 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। इसके अलावा 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया।

महिला संग्राहकों को 12.40 लाख चरण पादुका वितरित की गई हैं, जबकि वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका देने का प्रस्ताव है।

70 हजार से अधिक महिलाओं को आजीविका से जोड़ा

प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और पीएम जनमन योजना के तहत लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों की 70 हजार से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हुई हैं।

वन धन केंद्रों से जुड़े महिला समूहों को 5 करोड़ रुपये से अधिक कमीशन दिया गया। इन केंद्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पाद तैयार किए गए, जिनका मूल्य 4.42 करोड़ रुपये बताया गया है।

बस्तर में 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार का लक्ष्य

बस्तर के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद दूरस्थ वन क्षेत्रों में वानिकी गतिविधियों को फिर से गति देने की तैयारी है।

दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर में इमारती लकड़ी, बांस विदोहन और अन्य वानिकी कार्य प्रस्तावित हैं। इनसे 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

केदार कश्यप के मुताबिक इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और पलायन कम करने में मदद मिल सकती है।

बाघों की संख्या में करीब 94 प्रतिशत वृद्धि

वन्यजीव संरक्षण को लेकर सरकार ने बाघों की बढ़ती संख्या को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

सरकार के अनुसार, वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ में 18 बाघ थे, जिनकी संख्या वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। यानी करीब 94 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व 2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। वर्ष 2024 में इसकी अधिसूचना जारी हुई थी। एनटीसीए से बांधवगढ़ से तीन बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति भी मिल चुकी है।

बारनवापारा में कृष्ण मृग 200 के पार

बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस उपलब्धि की सराहना की थी।

इंद्रावती क्षेत्र में वन भैंसों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की संख्या 800 से 900 के बीच दर्ज की गई है।

‘गज संकेत’ से हाथी-मानव संघर्ष पर नजर

मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ जैसी पहल शुरू की गई है। प्रदेश में 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांवों में जागरूकता का काम कर रहे हैं।

12 अगस्त 2026 को दरभा में ‘गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया।

बस्तर की संस्कृति और देवगुड़ियों का संरक्षण

केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी प्रकृति और जनजातीय संस्कृति से जुड़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले ढाई वर्षों में 19.05 करोड़ रुपये की लागत से 572 देवगुड़ियों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया।

नारायणपुर के गढ़बेंगाल में पारंपरिक सांस्कृतिक संस्था ‘घोटुल’ के संरक्षण की दिशा में भी काम किया गया है।

कांगेर घाटी और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 2025 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे करीब 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी दी गई।

प्रदेश में कुल 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र विकसित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र स्वावलंबी होने का दावा किया गया है।

वनाग्नि पर अब 5 से 10 मिनट में रिस्पॉन्स

वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए आधुनिक फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है।

केदार कश्यप के अनुसार, पहले आग की सूचना के बाद प्रतिक्रिया में एक से दो घंटे तक लग जाते थे, लेकिन अब नियर रियल टाइम अलर्ट के चलते 5 से 10 मिनट में रिस्पॉन्स देने की व्यवस्था विकसित की गई है।

केदार कश्यप बोले—विकास और पर्यावरण दोनों साथ

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल वन क्षेत्र और वन्यजीवों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि वनवासियों की समृद्धि, किसानों की आय, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार तथा जनजातीय संस्कृति की सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता देना है।

सरकार के मुताबिक, वन संरक्षण, आधुनिक तकनीक, ईको-टूरिज्म और स्थानीय आजीविका को एक साथ जोड़कर छत्तीसगढ़ को प्रकृति और विकास के संतुलित मॉडल के रूप में आगे ले जाने का प्रयास जारी है।

सत्यधारा 24 | रायपुर

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