सत्यधारा 24 | जगदलपुर | 18 सितंबर 2026
जगदलपुर में जिस ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से पहले राजनीतिक टकराव ने माहौल गरमा दिया था, वही आयोजन आखिरकार पूरा हुआ और शहर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा।
मिताली चौक से मां दंतेश्वरी मंदिर क्षेत्र तक आयोजन की तैयारियों के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच विवाद, नारेबाजी और धक्का-मुक्की ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया था। लेकिन विवाद के बावजूद दीपोत्सव निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक आयोजित हुआ।


अब कार्यक्रम खत्म होने के बाद दीयों की रोशनी के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
भाजपा का संदेश—विरोध के बावजूद आयोजन नहीं रुका
भाजपा की ओर से पूरे घटनाक्रम को इस नजरिए से देखा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर विरोध के बावजूद कार्यकर्ताओं और शहरवासियों का उत्साह कम नहीं हुआ।
भाजपा महापौर संजय पांडे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ओर से दीपोत्सव को लेकर विरोध का माहौल बनाया गया और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के सामने भी विवाद की स्थिति पैदा की गई।
भाजपा का संदेश साफ है—आयोजन को लेकर चाहे जितना राजनीतिक विरोध हो, शहर में दीप जलाने का कार्यक्रम नहीं रुका और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के साथ पूरा हुआ।

कांग्रेस का पलटवार—दीयों से नहीं, व्यवस्था से था सवाल
कांग्रेस ने पूरे विवाद को अलग नजरिए से रखा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्हें दीप जलाने या दीपोत्सव मनाने से आपत्ति नहीं थी। सवाल आयोजन की जगह, दुकानों की व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही को लेकर था।

कांग्रेस का तर्क रहा कि मंदिर और मुख्य मार्ग के आसपास आयोजन की व्यवस्था के कारण छोटे दुकानदारों और ठेले वालों को परेशानी हुई। ऐसे में बड़े आयोजन के साथ स्थानीय व्यापारियों की रोजी-रोटी और श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
यानी कांग्रेस का संदेश भी स्पष्ट है—दीपोत्सव हो, लेकिन व्यवस्था ऐसी हो कि छोटे व्यापारी और आम जनता परेशानी में न आएं।
विजय शर्मा के सामने विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा मौके पर पहुंचे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ तीखी बहस हुई।

मामला आगे बढ़ा तो दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और स्थिति को नियंत्रित किया गया।
यहीं से स्थानीय व्यवस्था का मुद्दा सीधे भाजपा बनाम कांग्रेस की राजनीतिक बहस में बदल गया।
भाजपा ने इसे आयोजन के विरोध के रूप में देखा, जबकि कांग्रेस ने इसे दुकानदारों और आम लोगों की परेशानी का मुद्दा बताया।
आयोजन सफल, लेकिन सियासी सवाल अभी बाकी
आखिरकार जगदलपुर में दीप जले। शहर रोशन हुआ और कार्यक्रम पूरा हुआ। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने दो अलग-अलग राजनीतिक संदेश सामने रख दिए हैं।
यही वजह है कि दीपोत्सव खत्म होने के बाद भी जगदलपुर का राजनीतिक तापमान कम होता नजर नहीं आ रहा।
दीयों की रोशनी में एक सवाल
जगदलपुर में आखिरकार सवा लाख दीयों ने शहर को रोशन कर दिया, लेकिन इस आयोजन से जुड़ा राजनीतिक विवाद भी अपनी छाप छोड़ गया।
दीपोत्सव सफल रहा—इस पर विवाद नहीं।
लेकिन आयोजन को लेकर उठे सवालों और दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप का जवाब अब आने वाले दिनों की राजनीति देगी।
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