500 से अधिक विद्यार्थियों से सीधा संवाद, ठगी होते ही 1930 पर तत्काल सूचना देने की अपील

‘डिजिटल अरेस्ट’ में एक करोड़ से ज्यादा की ठगी, गोल्डन ऑवर में 60 लाख रुपये वापस
रायपुर, 12 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान को नई दिशा देने के लिए ‘साइबर संकल्प’ की शुरुआत की गई। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने 9 मॉड्यूल वाले वीडियो पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया।
‘साइबर संकल्प’ के तहत तैयार किए गए वीडियो मॉड्यूल में साइबर ठगी के बदलते तरीकों, डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के व्यावहारिक उपायों को आसान भाषा में समझाया जाएगा। प्रत्येक मॉड्यूल करीब 5 से 6 मिनट का है।

डिजिटल सुविधा के साथ सुरक्षा भी जरूरी

विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि बैंकिंग, खरीदारी, शिक्षा, व्यापार और सरकारी सेवाओं सहित बड़ी संख्या में गतिविधियां अब ऑनलाइन हो रही हैं। डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ा है।
उन्होंने विद्यार्थियों से खुद जागरूक रहने के साथ परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी के प्रति सतर्क करने की अपील की। खासकर गांवों तक साइबर जागरूकता पहुंचाने पर जोर दिया गया।
ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
कार्यक्रम में साइबर ठगी के बाद तत्काल कार्रवाई को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होने पर घबराने या इंतजार करने के बजाय तुरंत 1930 पर संपर्क करना चाहिए।

साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर सूचना मिलने से पुलिस को रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और उसे वापस दिलाने की कार्रवाई का मौका मिलता है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के पीड़ित ने बताई पूरी कहानी
कार्यक्रम में एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के शिकार डॉ. सेन ने अपना अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह साइबर अपराधियों ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर अपने जाल में फंसाया।
हालांकि समय रहते पुलिस को सूचना मिलने से ठगी की गई रकम में से 60 लाख रुपये वापस प्राप्त किए जा सके। इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि साइबर ठगी के बाद शुरुआती समय को ‘गोल्डन ऑवर’ की तरह देखा जाना चाहिए।

विद्यार्थियों से साइबर जागरूकता के दूत बनने की अपील
कार्यक्रम में विद्यार्थियों से सोशल मीडिया, फर्जी कॉल, ओटीपी, बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी लिंक और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों को लेकर अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की गई।
साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की साइबर क्राइम वालंटियर पहल के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े विषयों पर उपमुख्यमंत्री से सीधे संवाद किया।
छत्तीसगढ़ पुलिस का ‘साइबर जागृति अभियान’ 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। अभियान के जरिए प्रदेश में साइबर अपराधों से बचाव और ठगी की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
सत्यधारा 24
