सत्यधारा 24 | विशेष रिपोर्ट
मालदा, पश्चिम बंगाल। गंगा के लगातार बढ़ते कटाव ने मालदा जिले में तबाही की एक और तस्वीर सामने ला दी है। रतुआ क्षेत्र के मुनिरामटोला में करीब 175 साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर रविवार को तेज नदी कटाव की चपेट में आकर ढह गया और देखते ही देखते गंगा की धारा में समा गया।
मंदिर के नदी में समाने का वीडियो सामने आने के बाद घटना तेजी से चर्चा में है। स्थानीय लोगों के लिए यह महज एक इमारत का ढहना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से जुड़ी आस्था और स्थानीय विरासत के खत्म होने का दर्द है।
कटाव रोकने के इंतजाम भी नहीं आए काम
बताया जा रहा है कि मुनिरामटोला इलाके में लंबे समय से गंगा का कटाव जारी था। मंदिर भी पहले से ही खतरे के दायरे में आ चुका था। इसे बचाने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, लेकिन नदी की तेज धार और लगातार बढ़ते कटाव के सामने ये प्रयास टिक नहीं सके।
रविवार को कटाव इतना तेज हुआ कि मंदिर का हिस्सा अचानक नदी की ओर झुकने लगा और कुछ ही देर में पूरा मंदिर गंगा में समा गया।
बाढ़ और कटाव ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
मालदा के रतुआ और आसपास के इलाकों में गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले परिवारों को अपने घर और जमीन की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
स्थानीय स्तर पर जलस्तर बढ़ने की आशंका के बीच बिहार की ओर से आने वाले पानी के भारी प्रवाह को भी बाढ़ की स्थिति गंभीर होने की एक वजह माना जा रहा है।
हर साल निगल रही है जमीन
मालदा में गंगा का कटाव कोई नई समस्या नहीं है। नदी की बदलती धारा हर साल बड़ी मात्रा में जमीन, घर और कृषि क्षेत्र को प्रभावित करती है। लेकिन इस बार 175 साल पुराने शिव मंदिर का गंगा में समा जाना इस संकट की भयावहता को एक बार फिर उजागर कर गया है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि नदी कटाव को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी उपाय किए जाएं, ताकि आने वाले समय में और धार्मिक स्थलों, घरों तथा गांवों को गंगा की धारा में समाने से बचाया जा सके।
