17 सितंबर की शाम प्रदेशभर में जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’; 33 जिलों में बड़े आयोजन, लाखों दीपों की तैयारी और कांग्रेस के सवालों के बीच चर्चा में अभियान
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर पर छत्तीसगढ़ में इस बार केवल जन्मदिन समारोह नहीं, बल्कि एक बड़े जन-अभियान की तस्वीर दिखाई दे रही है। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के साथ प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से शाम को अपने घरों में मिट्टी का एक दीया जलाने की अपील की है। सरकार इसे सेवा, जनभागीदारी और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प से जोड़ रही है।
36 गढ़, 36 लाख दीयों का संदेश
भाजपा और अभियान से जुड़े आयोजकों की ओर से ‘36 गढ़ में 36 लाख दीये’ जलाने का लक्ष्य बताया जा रहा है। अलग-अलग जिलों में हजारों से लेकर लाखों दीप प्रज्वलित करने की तैयारियां हैं।
कुछ जिलों में बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में करीब 2 लाख दीये, बालोद जिले में 10 लाख दीयों का लक्ष्य और जिला मुख्यालय में लगभग 1 लाख दीप जलाने की तैयारी बताई गई है। वहीं रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और अन्य जिलों में भी बड़े स्तर पर सामूहिक दीप प्रज्वलन कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
गांव से शहर तक, स्कूल से राशन दुकान तक
‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गांव, शहर, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, शासकीय भवन, अमृत सरोवर, प्रधानमंत्री आवास, पीडीएस दुकानें, धार्मिक स्थल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी दीप जलाने की तैयारी की गई है। खाद्य विभाग ने प्रदेश की सभी शासकीय उचित मूल्य दुकानों में भी दीप प्रज्वलन के निर्देश जारी किए हैं।
प्रदेश के सभी 33 जिलों में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की मौजूदगी भी प्रस्तावित है। इसके लिए जिलावार जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
एक दीया और आत्मनिर्भरता का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं सड़क किनारे दीये बेच रही महिला से मिट्टी का दीया खरीदकर स्थानीय कारीगरों और स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन देने का संदेश दिया। अभियान में ‘बिहान’ समूहों और ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी जोड़ी जा रही है।

कांग्रेस का सवाल—खर्च किस मद से होगा?
जहां भाजपा और सरकार इस अभियान को सेवा, जनभागीदारी और प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस ने आयोजन के पैमाने और सरकारी भागीदारी पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पूछा है कि लाखों दीयों, तेल और व्यवस्थाओं का खर्च किस मद से होगा तथा कार्यक्रम में सरकारी तंत्र की भूमिका क्या है। विपक्ष का कहना है कि यदि आयोजन राजनीतिक स्वरूप का है तो खर्च और संसाधनों के उपयोग की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
वहीं सरकार और आयोजन से जुड़े पक्षों का कहना है कि यह अभियान सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का प्रतीक है तथा अधिक से अधिक नागरिकों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
तो क्या यह केवल जन्मदिन का कार्यक्रम है?
यही इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा प्रश्न बन गया है।
एक ओर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर शुभकामना और सेवा का संदेश है, तो दूसरी ओर लाखों दीयों, सरकारी संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और प्रशासनिक तैयारियों के कारण यह अभियान सामान्य जन्मदिन कार्यक्रम से कहीं बड़ा दिखाई देता है।
समर्थकों के लिए यह प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और सेवा का संकल्प है, जबकि विपक्ष इसे सरकारी भूमिका और खर्च के सवालों से जोड़कर देख रहा है।
सत्यधारा 24 की नजर से
एक अकेला दीया केवल प्रकाश देता है, लेकिन जब लाखों दीये एक साथ जलते हैं तो वे एक संदेश भी बन जाते हैं।
17 सितंबर की शाम छत्तीसगढ़ में जलने वाले ये दीप किसी के लिए शुभकामना होंगे, किसी के लिए सेवा का संकल्प और किसी के लिए राजनीतिक चर्चा का विषय।
लेकिन इस पूरे आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि सेवा, जनभागीदारी और पारदर्शिता—इन तीनों के बीच संतुलन किस तरह दिखाई देता है।
जब प्रदेश के गांव, शहर और चौक-चौराहे दीपों से जगमगाएंगे, तब केवल दीयों की संख्या नहीं, बल्कि उनके पीछे का संदेश भी चर्चा का केंद्र होगा।
— सत्यधारा 24 विशेष रिपोर्ट
