नई दिल्ली | सत्यधारा 24

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का दौर अब धीरे-धीरे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। अगस्त का आखिरी सप्ताह शुरू हो चुका है और ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मानसून की विदाई कब से शुरू होगी और देश से पूरी तरह कब तक लौट जाएगा?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मानदंडों के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के चरम हिस्सों से मानसून की वापसी 1 सितंबर से पहले शुरू नहीं मानी जाती। मानसून की वापसी घोषित करने के लिए केवल बारिश का कम होना ही पर्याप्त नहीं है। किसी क्षेत्र में लगातार करीब पांच दिनों तक बारिश की गतिविधियों में कमी, निचले क्षोभमंडल में प्रतिचक्रवात जैसी परिस्थितियां और वातावरण में नमी में कमी जैसे संकेत भी देखे जाते हैं।

सितंबर में दिखेगा मानसून की वापसी का पहला संकेत

अगस्त के अंतिम दिनों में मानसून की गतिविधियों में क्षेत्रीय बदलाव दिखाई देने लगते हैं। खासकर उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधि कमजोर पड़ने के बाद मानसून की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सितंबर शुरू होते ही पूरे देश से बारिश गायब हो जाएगी। मानसून की वापसी चरणबद्ध तरीके से होती है और अलग-अलग राज्यों में इसका समय अलग हो सकता है।

2026 में मानसून क्यों चर्चा में है?

इस साल देश में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रही है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के Monsoon Online आंकड़ों के अनुसार 21 अगस्त तक देश में 544.3 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य बारिश 627.4 मिमी होती है। यानी करीब 13.25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

हालिया रिपोर्टों में भी मानसून के कमजोर पड़ने के संकेतों की चर्चा हुई है। हालांकि देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं है और कुछ क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक बारिश भी हुई है।

क्या सितंबर में भी होगी जोरदार बारिश?

मानसून की वापसी शुरू होने के बावजूद सितंबर में कई राज्यों में बारिश के दौर जारी रह सकते हैं। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र और अन्य मौसमी प्रणालियां मध्य, पूर्वी तथा दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में बारिश करा सकती हैं।

इसलिए मानसून की वापसी का मतलब तत्काल बारिश का पूरी तरह खत्म होना नहीं है।

कई बार मानसून की वापसी शुरू होने के बाद भी कुछ इलाकों में भारी बारिश देखने को मिलती है।

दक्षिण भारत में क्या होगा?

दक्षिण भारत में मानसून की विदाई उत्तर-पश्चिम भारत की तुलना में काफी बाद में होती है। IMD के संशोधित सामान्य मानकों के अनुसार दक्षिण भारत से मानसून की अंतिम वापसी की सामान्य तारीख लगभग 15 अक्टूबर मानी जाती है।

इसका मतलब है कि सितंबर में उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क होने लगे, तब भी दक्षिण और प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मानसून की वापसी?

मानसून की वापसी की तारीख किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश में कमी से खरीफ फसलों की स्थिति, मिट्टी की नमी, जलाशयों और सिंचाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।

वहीं अगर मानसून की वापसी में देरी होती है और सितंबर में अच्छी बारिश मिलती है तो कई इलाकों में खरीफ फसलों को फायदा भी हो सकता है।

कब मानी जाएगी मानसून की पूरी विदाई?

मानसून की वापसी किसी एक दिन पूरे देश से नहीं होती। यह उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होकर धीरे-धीरे मध्य, पश्चिम और दक्षिणी हिस्सों की ओर आगे बढ़ती है।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मानसून किसी निश्चित तारीख को पूरे देश से विदा हो जाएगा। आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियों को देखकर IMD चरणबद्ध तरीके से वापसी की घोषणा करेगा।

निष्कर्ष

अगस्त के आखिरी सप्ताह में मानसून अभी पूरी तरह विदा होने की स्थिति में नहीं है। सितंबर की शुरुआत के बाद उत्तर-पश्चिम भारत से इसकी वापसी के संकेत मिलने की संभावना रहती है।

हालांकि देश के कई हिस्सों में सितंबर के दौरान भी बारिश जारी रह सकती है। दक्षिण भारत में मानसून का असर अक्टूबर तक बने रहने की सामान्य संभावना रहती है।

यानी फिलहाल छाता और बारिश से राहत की उम्मीद रखने वालों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है—मानसून की विदाई शुरू होने में अभी वक्त है।

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