₹4.30 लाख की कमी से खुला राज, असली नोट आखिर गए कहां? सहारनपुर की करेंसी चेस्ट में जांच गहराई, SIT और RBI की टीमें खंगाल रहीं कैश का पूरा ट्रेल
सत्यधारा 24 | उत्तर प्रदेश
सहारनपुर, 1 सितंबर 2026। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सहारनपुर स्थित करेंसी चेस्ट में कथित नकली नोटों के बड़े मामले ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में शुरुआती जांच के दौरान करीब ₹7.40 करोड़ मूल्य की संदिग्ध करेंसी मिलने की जानकारी सामने आई थी। जांच और कैश के सत्यापन का दायरा बढ़ने के साथ यह आंकड़ा अब करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि अंतिम रकम ऑडिट और नोटों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले में PNB के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पुलिस ने जांच के लिए SIT गठित की है, जबकि RBI और PNB की संयुक्त टीम भी करेंसी चेस्ट में रिकॉर्ड और नकदी के पूरे ट्रेल की पड़ताल कर रही है।
₹4.30 लाख की कमी ने खोला करोड़ों की गड़बड़ी का राज
मामला तब सामने आया जब करेंसी चेस्ट से भेजी गई करीब ₹11.50 करोड़ की नकदी के मिलान के दौरान लगभग ₹4.30 लाख की कमी सामने आई।
इसके बाद PNB ने करेंसी चेस्ट की विस्तृत जांच शुरू की। नोटों की गिनती, सत्यापन और रिकॉर्ड के मिलान के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध नोट सामने आने लगे। शुरुआती जांच में करीब 148 बंडल संदिग्ध नोट मिलने की बात सामने आई थी।
यहीं से मामला महज कैश मिसमैच से निकलकर एक बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की आशंका तक पहुंच गया।
₹7.40 करोड़ से करीब ₹17 करोड़—जांच बढ़ी तो रकम भी बढ़ती गई
शुरुआत में संदिग्ध करेंसी की कीमत करीब ₹7.40 करोड़ बताई गई। लेकिन करेंसी चेस्ट में रखी नकदी की व्यापक जांच आगे बढ़ने के साथ यह रकम बढ़कर करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
हालांकि पुलिस और बैंक अधिकारियों के मुताबिक गिनती और रिकंसिलिएशन की प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए ₹17 करोड़ को अंतिम आंकड़ा मानना जल्दबाजी होगी। अंतिम राशि जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
सबसे बड़ा सवाल—असली नोट आखिर गए कहां?
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर सवाल यही है।
अगर करेंसी चेस्ट में असली नोटों की जगह कथित नकली नोट रखे गए थे, तो फिर उन असली नोटों का क्या हुआ?
क्या उन्हें चेस्ट से बाहर निकाला गया?
क्या रिकॉर्ड में हेरफेर हुआ?
क्या असली और नकली नोटों के बंडल बदले गए?
या फिर कैश की गिनती और सत्यापन की प्रक्रिया में लंबे समय तक गंभीर चूक होती रही?
जांच एजेंसियां अब इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही हैं।
CCTV से लेकर कैश रिकॉर्ड तक, हर कड़ी की जांच
जांच का दायरा अब सिर्फ कथित नकली नोटों की पहचान तक सीमित नहीं है। करेंसी चेस्ट में नकदी के आने, गिनती, सत्यापन, बंडल तैयार करने, सील लगाने और सुरक्षित रखने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
इसके साथ ही CCTV फुटेज, कैश रिकॉर्ड, रजिस्टर, बंडलों की सील, नोटों के सीरियल नंबर और नकदी के आवागमन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों की कोशिश यह पता लगाने की है कि संदिग्ध नोट करेंसी चेस्ट तक कब पहुंचे और असली नकदी के साथ कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई।
तीन बैंक अधिकारी सस्पेंड
PNB ने मामले में तीन अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें वरिष्ठ मंडलीय अधिकारी रवि कुमार कसे तथा करेंसी चेस्ट से जुड़े प्रबंधक सुशील शर्मा और अमित कुमार शामिल बताए गए हैं। तीनों के खिलाफ बैंक की शिकायत पर मामला दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।
एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार के खिलाफ भी अलग नकदी कमी से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई है। CCTV जांच में उसके द्वारा नोटों के बंडलों से नकदी निकालने की बात सामने आने की रिपोर्ट है।
हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। निलंबन या FIR अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
SIT के सामने सबसे बड़े सवाल
- करोड़ों रुपये की कथित नकली करेंसी करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे?
- यदि असली नोटों को बदला गया तो असली रकम कहां गई?
- इतनी बड़ी गड़बड़ी नियमित कैश मिलान में पहले क्यों नहीं पकड़ी गई?
- बंडलों की सील और पैकिंग में कहीं छेड़छाड़ हुई या नहीं?
- CCTV में कौन-कौन सी गतिविधियां सामने आती हैं?
- कैश रिकॉर्ड और वास्तविक नकदी में अंतर कब से मौजूद था?
- ₹7.40 करोड़ से बढ़कर करीब ₹17 करोड़ तक पहुंची रकम का अंतिम आंकड़ा क्या होगा?
- क्या इस मामले में बैंक के बाहर के लोगों या किसी नेटवर्क की भूमिका भी है?
क्या मामला सिर्फ बैंक के अंदर तक सीमित है?
यही जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अगर जांच में यह साबित होता है कि असली नोटों को व्यवस्थित तरीके से निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए, तो मामला केवल बैंक की आंतरिक लापरवाही का नहीं रहेगा।
फिर जांच को उन लोगों तक भी पहुंचना होगा जिन्होंने कथित तौर पर नकली नोटों की व्यवस्था, उनके प्रवेश या असली करेंसी को बाहर निकालने में भूमिका निभाई हो सकती है।
फिलहाल किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है और इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।
RBI और PNB की संयुक्त टीम भी जांच में जुटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए RBI और PNB की संयुक्त टीम ने करेंसी चेस्ट में पहुंचकर रिकॉर्ड और नकदी की जांच की है। रिपोर्टों के मुताबिक टीम ने कई घंटे तक कैश के पूरे ट्रेल, बंडल, सील, रजिस्टर और नकदी के आने-जाने से जुड़े दस्तावेज खंगाले।
पुलिस की SIT भी मामले की जांच कर रही है और जांच का दायरा सहारनपुर से बाहर हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों तक बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है।
सत्यधारा 24 की पड़ताल
करेंसी चेस्ट बैंकिंग सिस्टम का वह हिस्सा है जहां बड़ी मात्रा में नकदी को सुरक्षित रखा और व्यवस्थित किया जाता है। ऐसे में वहां करोड़ों रुपये मूल्य की कथित संदिग्ध करेंसी मिलना सामान्य बैंकिंग गड़बड़ी नहीं माना जा सकता।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नकली नोट कितने थे।
सवाल यह है कि—
करोड़ों की कथित नकली करेंसी अंदर पहुंची कैसे?
असली रकम अगर बदली गई तो वह गई कहां?
और इतनी बड़ी गड़बड़ी बैंक की निगरानी व्यवस्था की नजर से बची कैसे रही?
इन सवालों के जवाब SIT की जांच, RBI की पड़ताल और अंतिम ऑडिट रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल मामला खुल चुका है, लेकिन इस कथित करोड़ों के खेल की असली कड़ी अभी सामने आना बाकी है।
