INDIA ब्लॉक का ECI मार्च रोके जाने पर गरमाई सियासत, राहुल बोले—“हम जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, फिर हमें क्यों रोका जा रहा है?”

सत्यधारा 24 | नई दिल्ली

निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्ष और केंद्र के बीच जारी राजनीतिक टकराव 6 अक्टूबर को दिल्ली की सड़कों पर खुलकर सामने आ गया। INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सवाल उठाते हुए संसद से निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला। मार्च को पुलिस ने निर्वाचन आयोग पहुंचने से पहले रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने धरना दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।

“Gyanesh, it’s done, bro…”

मार्च के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा—

“Gyanesh, it’s done, bro. Time to resign.”

यानी—“ज्ञानेश, अब बहुत हो गया। इस्तीफा देने का समय है।”

राहुल का यह संदेश ऐसे समय आया, जब INDIA ब्लॉक के सांसद निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे और पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया था।

संसद से ECI तक मार्च, रास्ते में लगा ब्रेक

विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर निकले थे। मार्च संसद मार्ग पर नीति आयोग के पास रोका गया। सुरक्षा बलों और पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

इस दौरान राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़े और हाथ में तिरंगा लेकर नजर आए। इसके बाद विपक्षी सांसद सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बाद में आकाशवाणी भवन परिसर में भी पहुंचे और निर्वाचन आयोग तक जाने की मांग पर अड़े रहे।

राहुल का सवाल—“हमें क्यों रोका जा रहा है?”

धरने के दौरान राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आयोग विपक्षी सांसदों से मिलने को तैयार क्यों नहीं है।

राहुल ने कहा कि विपक्ष के करीब 300 सांसद निर्वाचन आयोग तक पहुंचे हैं और वे जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उन्हें आयोग से मिलने से क्यों रोका जा रहा है, यह सवाल उठता है।

SIR और मतदाता सूची बना टकराव का केंद्र

विपक्ष का मुख्य आरोप SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े बदलावों को लेकर है। INDIA ब्लॉक के नेताओं ने इसी मुद्दे को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ा जब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। अदालत ने केंद्र, निर्वाचन आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए। हालांकि अदालत ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने के लिए एकतरफा अंतरिम आदेश देने से इनकार किया।

पुलिस कार्रवाई के बाद और बढ़ा तनाव

मार्च रोके जाने के बाद विपक्षी नेताओं का धरना कई घंटे चला। बाद में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद भी विपक्ष ने साफ किया कि SIR और निर्वाचन आयोग को लेकर उसका अभियान जारी रहेगा।

विपक्ष की ओर से जहां इसे मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताया जा रहा है, वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में यह विवाद अब केवल एक मार्च या एक बयान तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग की भूमिका और राजनीतिक भरोसे को लेकर बड़ा टकराव बनता जा रहा है।

अब सवाल सिर्फ इस्तीफे का नहीं

राहुल गांधी का “Gyanesh, it’s done, bro. Time to resign” वाला संदेश विपक्ष के रुख को स्पष्ट करता है—वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को पीछे हटाने के मूड में नहीं है।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर आगे की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अब और महत्वपूर्ण हो सकती है। दिल्ली में 6 अक्टूबर का मार्च इस टकराव का एक और बड़ा सार्वजनिक पड़ाव बन गया है।

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