महिला वनबल ने संभाला मोर्चा, ISRO सैटेलाइट इमेजरी और DGPS ड्रोन मैपिंग से हुआ वैज्ञानिक सीमांकन; 166 आरोपी चिन्हित

चार साल में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि अतिक्रमण मुक्त कराने का विभाग का दावा
रायपुर/गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के सीतानदी कोर रेंज में वनभूमि अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से करीब 106 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि को मुक्त कराने की कार्रवाई की गई। अभियान में धमतरी, गरियाबंद, कांकेर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की महिला वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2011-13 के 45 हेक्टेयर से बढ़कर 106 हेक्टेयर तक पहुंचा अतिक्रमण
वन विभाग के अनुसार संबंधित क्षेत्र में वर्ष 2011-13 के दौरान करीब 45 हेक्टेयर अतिक्रमण दर्ज था। समय के साथ इसका विस्तार करीब 106 हेक्टेयर तक हो गया। अतिक्रमण के वास्तविक क्षेत्र और उसकी सीमा निर्धारित करने के लिए विभाग ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि वन संपदा और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। संवेदनशील वन क्षेत्रों में अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के साथ तकनीक आधारित निगरानी और मुक्त कराई गई भूमि के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

ISRO की तस्वीरों से लेकर ड्रोन मैपिंग तक, ऐसे हुआ सीमांकन
अतिक्रमित क्षेत्र की पहचान और सीमांकन के लिए ISRO की सैटेलाइट इमेजरी तथा DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग का उपयोग किया गया। अलग-अलग वर्षों की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन कर वन क्षेत्र में हुए बदलावों का आकलन किया गया। इसके बाद ड्रोन सर्वे के जरिए अतिक्रमित भूमि की सीमा का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण किया गया।

विभाग के मुताबिक इस मामले में 166 आरोपियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 40 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। विभाग का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, मैदानी अभिलेखों और उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है।
चार साल में 1,000 हेक्टेयर से ज्यादा वनभूमि मुक्त कराने का दावा
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों से अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग के अनुसार इस अवधि में अलग-अलग क्षेत्रों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। सीतानदी कोर रेंज की ताजा कार्रवाई इसी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
अतिक्रमण हटाने के बाद केवल जमीन खाली कराने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई है। विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का काम भी शुरू किया है। इसके तहत कंटूर ट्रेंच, वर्षाजल संचयन, मृदा-नमी संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही करीब 1,500 पौधे लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
हाथी कॉरिडोर और महानदी उद्गम क्षेत्र के करीब है इलाका
मुक्त कराया गया क्षेत्र हाथी कॉरिडोर का हिस्सा बताया गया है और यह महानदी के उद्गम क्षेत्र के निकट स्थित है। ऐसे में इस क्षेत्र का संरक्षण वन्यजीवों की आवाजाही, जल संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महिला वनबल ने संभाला अभियान का मोर्चा
पूरे अभियान में महिला वन अधिकारियों और वनकर्मियों की भूमिका विशेष रूप से सामने आई। धमतरी, गरियाबंद, कांकेर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की महिला टीमों ने दुर्गम और संवेदनशील वन क्षेत्रों में कार्रवाई में हिस्सा लिया।
विभाग के अनुसार घुरावाड़, बरबंधा और भुरसीडोंगरी के ग्रामीणों का भी अभियान में सहयोग मिला।
वन मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को मुक्त कराए गए क्षेत्र की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने और वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों में अतिक्रमण के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
