Instagram, Facebook समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों के अकाउंट रोकने के लिए IT नियमों में वैधानिक बदलाव की तैयारी

नई दिल्ली। 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार अब नियमों में बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने संकेत दिया कि Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में ऐसा वैधानिक प्रावधान लाया जा सकता है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 18 साल से कम उम्र के बच्चों को अपने नाम से अकाउंट खोलने की अनुमति न दें।

मामला सिर्फ Instagram या Facebook इस्तेमाल करने की उम्र का नहीं है। इसके केंद्र में यह कानूनी सवाल है कि जब 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति स्वतंत्र रूप से अनुबंध नहीं कर सकता, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की Terms of Service स्वीकार करके अकाउंट बनाने की उसकी कानूनी स्थिति क्या होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाया 18 साल की उम्र का सवाल

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र से मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करने के लिए वैधानिक व्यवस्था पर विचार करने को कहा। अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि 12-13 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट कैसे चला सकते हैं, जबकि भारतीय कानून में नाबालिगों की स्वतंत्र संविदात्मक क्षमता को लेकर स्पष्ट सीमाएं हैं।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से इस मुद्दे पर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। केंद्र ने संकेत दिया कि नियमों में ऐसा प्रावधान लाया जा सकता है, जिससे सोशल मीडिया इंटरमीडियरी के लिए नाबालिगों के अकाउंट खोलने पर रोक वैधानिक जिम्मेदारी बन जाए।

क्या अब 18 साल से कम उम्र में Instagram बंद हो जाएगा?

फिलहाल ऐसा कोई तत्काल प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है।

यह अंतर समझना बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई है और केंद्र ने नियमों में बदलाव की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। लेकिन अंतिम नियम, उनकी भाषा, उम्र सत्यापन की व्यवस्था और लागू होने की तारीख आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी।

यानी अभी सोशल मीडिया पर चल रही यह बात कि “आज से 18 साल से कम उम्र वालों का Instagram बंद हो जाएगा” सही नहीं है।

माता-पिता की मंजूरी से मिल सकता है रास्ता?

सुनवाई में Parental Consent यानी माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सत्यापित सहमति का विकल्प भी सामने आया।

याचिका में मांग की गई है कि नाबालिगों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की अनुमति तभी मिले, जब माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति हो। इसके साथ अभिभावक की पहचान सत्यापन जैसी व्यवस्था का भी सुझाव दिया गया है।

हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि अंतिम व्यवस्था पूर्ण प्रतिबंध, अभिभावकीय सहमति, या किसी अन्य उम्र-आधारित मॉडल के रूप में होगी।

13 साल की उम्र बनाम भारत का 18 साल का कानूनी ढांचा

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लंबे समय से 13 वर्ष या उससे अधिक उम्र के यूजर्स को अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इसी अंतर को प्रमुखता से उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सोशल मीडिया अकाउंट बनाते समय यूजर को प्लेटफॉर्म की Terms of Service और अन्य शर्तें स्वीकार करनी होती हैं, जबकि भारतीय कानून में 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति की स्वतंत्र संविदात्मक क्षमता सीमित है।

यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है—

जब नाबालिग स्वतंत्र रूप से कानूनी अनुबंध नहीं कर सकता, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ उसका अकाउंट किस कानूनी आधार पर संचालित हो रहा है?

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

इस मामले में सिर्फ अकाउंट बनाने की उम्र ही मुद्दा नहीं है। याचिका में ऑनलाइन ग्रूमिंग, साइबरबुलिंग, यौन शोषण, निजी डेटा के दुरुपयोग और बच्चों तक उम्र के अनुकूल नहीं होने वाले कंटेंट की पहुंच जैसे जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है।

इसी वजह से प्रस्तावित व्यवस्था का असर Age Verification, Data Protection और Parental Control जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।

Digital Personal Data Protection कानून भी चर्चा में

सुनवाई के दौरान केंद्र ने Digital Personal Data Protection Act, 2023 के प्रावधानों का भी संदर्भ दिया। केंद्र की ओर से यह संकेत दिया गया कि बच्चों से संबंधित डेटा और अभिभावकीय सहमति के लिए डेटा संरक्षण कानून में प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि सुनवाई में यह भी चर्चा हुई कि संबंधित व्यवस्था के लागू होने की समयसीमा को देखते हुए तत्काल नियामकीय कदम की जरूरत हो सकती है।

अब आगे क्या होगा?

केंद्र को इस मुद्दे पर मौजूदा IT नियमों के तहत वैधानिक व्यवस्था की संभावना पर विचार करना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानून के अनुरूप काम करना होगा।

इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों को सिर्फ यूजर द्वारा बताई गई उम्र पर निर्भर रहने के बजाय उम्र सत्यापन और नाबालिग यूजर्स की पहचान से जुड़े नियमों का पालन करना पड़ सकता है।

असली सवाल: बच्चों को ऑनलाइन दुनिया से दूर रखा जाए या सुरक्षित रास्ता दिया जाए?

यह बहस अब सिर्फ Instagram, Facebook या Snapchat तक सीमित नहीं है।

बच्चों की डिजिटल दुनिया में मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार, अदालत, सोशल मीडिया कंपनियों और अभिभावकों के सामने बड़ा सवाल यही है—

क्या 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर पूरी रोक लगाई जाएगी, या अभिभावकीय सहमति और उम्र सत्यापन के जरिए नियंत्रित रास्ता बनाया जाएगा?

इसका जवाब केंद्र के प्रस्तावित नियमों और आगे होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से स्पष्ट होगा।

सत्यधारा 24 | डिजिटल डेस्क

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