तमिलनाडु की सियासत में नया वार-पलटवार, TVK प्रमुख विजय की राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा पर AIADMK नेता ने साधा निशाना

सत्यधारा 24। राजनीति

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री विजय को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट किए जाने की चर्चा के बीच AIADMK नेता ई. पलानीस्वामी ने उन पर तीखा तंज कसा है।

पलानीस्वामी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर विजय प्रधानमंत्री बन सकते हैं, तो अमेरिका के राष्ट्रपति भी बन सकते हैं। उनके इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।

‘सपना देखने में कोई बुराई नहीं’

पलानीस्वामी ने विजय की राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि सपना देखने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन राजनीतिक सपने और जमीन पर राजनीतिक संगठन खड़ा करना दो अलग-अलग बातें हैं।
उन्होंने विजय की राजनीति को सोशल मीडिया और प्रचार से जोड़ते हुए कटाक्ष किया कि केवल रील और प्रचार के जरिए सरकार नहीं चलाई जा सकती।

विजय की नजर तमिलनाडु से आगे?

अभिनेता विजय ने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी समर्थक उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी ताकत के तौर पर पेश कर रहे हैं।
अब बहस सिर्फ मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं है। विजय को भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने की बातें भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनने लगी हैं।

‘रील’ की राजनीति बनाम जमीन की राजनीति

पलानीस्वामी ने विजय के प्रचार अभियान, सोशल मीडिया और चार्टर्ड फ्लाइट जैसे मुद्दों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सरकार के खर्च और कामकाज को लेकर भी सवाल खड़े किए।
हालांकि, पलानीस्वामी के ये बयान राजनीतिक आलोचना और आरोपों के तौर पर देखे जाने चाहिए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग विषय है।

सवाल अब सिर्फ लोकप्रियता का नहीं

विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी फिल्मी लोकप्रियता को स्थायी राजनीतिक समर्थन में बदलने की होगी।
राजनीति में भीड़ जुटाना और चुनाव जीतना अलग-अलग चीजें हैं। संगठन, बूथ स्तर की पकड़, उम्मीदवारों का नेटवर्क, नीतियां और जनता के बीच लगातार मौजूदगी ही तय करेगी कि विजय की राजनीतिक यात्रा कितनी दूर जाती है।
तमिलनाडु की सियासत में अब दिलचस्प मुकाबला सिर्फ पुराने और नए नेताओं के बीच नहीं, बल्कि स्टारडम और पारंपरिक राजनीतिक संगठन के बीच भी दिखाई दे रहा है।


सत्यधारा 24 का सवाल
क्या विजय की लोकप्रियता उन्हें तमिलनाडु की सत्ता तक पहुंचा सकती है, या उनके समर्थकों की राष्ट्रीय राजनीति वाली उम्मीदें अभी समय से पहले हैं?
आने वाले चुनाव इस सवाल का सबसे बड़ा जवाब होंगे।

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